
कोरबा :-हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर गुरुवार को कोरबा शहर ने आस्था, संस्कृति और जनउत्साह का ऐसा विराट दृश्य देखा, जिसने पूरे शहर को एक सूत्र में बांध दिया। सुबह से ही नगर में उत्सव का माहौल देखने को मिला हर गली, हर चौक भगवा ध्वजों से सजा हुआ था, जबकि रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक सजावट ने पूरे शहर को मानो दुल्हन की तरह सजा दिया था।

इस शोभायात्रा की सबसे बड़ी विशेषता रही देश के विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृतियों का अद्भुत संगम। छत्तीसगढ़ के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, केरल, पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत कुल 13 राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा और लोकनृत्य प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत झांकियां न केवल आकर्षण का केंद्र बनीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि का जीवंत प्रदर्शन भी करती नजर आईं। जगह-जगह इन झांकियों का पुष्पवर्षा और तालियों के साथ स्वागत किया गया।
डीजे पर बजते भक्ति गीतों और जयघोषों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। “जय श्रीराम” के गगनभेदी नारों के बीच युवा, महिलाएं और बच्चे झूमते नजर आए। हाथों में भगवा ध्वज लिए युवाओं की टोलियां अनुशासन और ऊर्जा के साथ यात्रा में शामिल रहीं। यात्रा मार्ग पर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा सेवा स्टॉल लगाए गए थे। यहां श्रद्धालुओं के लिए ठंडा पानी, शरबत, फल और खाद्य सामग्री की व्यवस्था की गई थी। भीषण गर्मी के बीच यह सेवा व्यवस्था लोगों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनी। सुभाष चौक निहारिका, घंटाघर सहित कई प्रमुख स्थानों पर झांकियों का विशेष स्वागत किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग रुककर प्रस्तुतियों का आनंद लेते नजर आए।

कोरबा में मनाया गया हिंदू नववर्ष का यह उत्सव भव्यता, आस्था और सांस्कृतिक विविधता का अद्वितीय उदाहरण बन गया।हालांकि ट्रैफिक प्रबंधन की कमियां सामने आईं, लेकिन जनसैलाब का जोश और श्रद्धा इस आयोजन को ऐतिहासिक बना गई।


